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अगर आप हर योजना का विरोध करेंगे तो देश तरक्की कैसे करेगा? : सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र जयकवाड़ी बांध पर अक्षय ऊर्जा परियोजना का विरोध करने वाली कहार समाज पंच समिति नामक गैर सरकारी संगठन की याचिका खारिज कर दी और कहा कि अगर हर परियोजना का विरोध होगा तो देश तरक्की कैसे करेगा? सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीओ की इस याचिका को दायर करने की पात्रता पर सवाल उठाया और कहा, “आपको किसने लगाया?” आपको फंड कौन देता है? पर्यावरण संरक्षण में आपका पिछला अनुभव क्या है? सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि जो कंपनी टेंडर जीतने में विफल रही, उसने आपको धन मुहैया कराया है और इस प्रकार वह बेतुकी कानूनी कार्यवाही का सहारा लेकर परियोजना को रोकने की कोशिश कर रही है।

एनजीओ की याचिका को खारिज करते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण की पश्चिमी क्षेत्र पीठ ने पिछले साल 9 सितंबर को कहा था कि वह पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों में ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाने वाले किसी कानून का हवाला नहीं दे सकती। हरित अधिकरण ने कहा कि टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लि., जो राष्ट्रीय ताप विद्युत निगम-एनटीपीसी, महाराष्ट्र सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के स्वामित्व वाली कंपनी है। जयकवाडी बांध में तैरती सौर परियोजना स्थापित करने के लिए निविदाएं जारी की गईं। यह परियोजना संभाजी नगर जिले के जयकवाड़ी गांव में स्थित एक बांध पर स्थापित की जा रही थी। एनजीओ ने प्रस्तावित परियोजना को रद्द करने के लिए अदालत से आदेश मांगा था।

सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीटी के आदेश में संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं समझी। पीठ ने कहा कि आप एक भी योजना को चलने नहीं दे रहे हैं। अगर हर योजना का विरोध होगा तो देश तरक्की कैसे करेगा? आपको सौर ऊर्जा परियोजनाओं में भी समस्या है। एनजीओ ने तर्क दिया कि तैरती सौर ऊर्जा परियोजना से बांध के जलीय जीवन पर असर पड़ेगा और क्षेत्र की जैव विविधता को स्थायी नुकसान पहुंचेगा।

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