पेंटिंग मेरा पैशन है
पेंटिंग्स का शौख मुझे बचपन से रहा है। मेरा ये पैशन आज मेरा प्रोफेशन बन गया है। मेरी कला को निखारने में मेरे पापा का बहुत बड़ा योगदान है। पोस्ट ग्रेजुएशन करते ही शादी हो गई। फिर फैमिली और बच्चों की देखभाल में 12 साल तक अपनी कला से दूर रहना पड़ा। ऐसा नहीं है कि मैंने अपने आर्ट को पूरी तरह छोड़ दिया था। इस बीच मैंने अपने दोनों बच्चों को पेंटिंग सिखाई। रंगों से प्रेम करना, कला के जरिए से संयम और सुकून से जीना सिखाया। अच्छी किताबें पढ़ने की आदत डाली। कला निष्पक्ष होकर मानव सेवा और इंसानियत सिखाती है।
देश-विदेश के लोगों को पेंटिंग सिखाती हूं
बच्चे बड़े हुए तो मैंने फिर से प्रोफेशनल आर्टिस्ट के तौर पर अपना नया सफर शुरू किया। तब से आज तक कई नेशनल, इंटरनेशनल ग्रुप एक्जीबिशन, इजिप्ट, लंदन, अमेरिका, कोरिया, मैरीलैंड, इंडोनेशिया में भी ग्रुप एक्जीबिशन कर चुकी हूं। काफी सारे इंटरनेशनल आर्ट प्रोजेक्ट में अपने फैलो आर्टिस्ट के साथ हिस्सा ले चुकी हूं। मैं वर्ल्ड वाइड ऑनलाइन वर्कशॉप और क्लासेज भी कंडक्ट करती हूं। मेरे स्टूडेंट्स 10 साल के बच्चे भी हैं और 60 साल की वयस्क महिलाएं भी। इंजीनियर, डॉक्टर, फैशन डिजाइनर, फाइन आर्ट स्टूडेंट्स से लेकर होममेकर भी मेरी ऑनलाइन क्लासेस अटेंड करते हैं। मुझे अच्छा लगता है जब दूसरे देश के स्टूडेंट कहते हैं कि हमने सुना है शादमा खान युसुफजई अच्छी आर्टिस्ट, आर्ट मेंटर ही नहीं, अच्छी इंसान भी हैं। सच कहूं तो यही सुनना मेरी जिंदगी की असल कमाई है।
परिवार से सीखी मानव सेवा
हमारे पूर्वज रामपुर उत्तर प्रदेश के निवासी थे। हमारे पूर्वजों ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांतों पर हमेशा मानवसेवा की है। हम सभी अपने बुजुर्गों के उसूलों पर चलने की कोशिश कर रहे हैं। मेरे ननिहाल की तरफ से मैं उन महान स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों की वंशज हूं, जिन्होंने भारत में मंगल पांडे से 27 वर्ष पूर्व अंग्रेज़ी राज्य के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह किया था। नरसिंहगढ़ रियासत के कुंवर चैन सिंह का साथ देते हुए 24 जुलाई 1824 को अंग्रेज़ों से लड़ते हुए हिम्मत खान बहादुर खान लोदी तथा अन्य सरदारों ने शहादत पाईं। हर साल मध्य प्रदेश सरकार उन वीरों को गार्ड ऑफ ऑनर देती हैं। इसी अवसर पर मेरे मामा डॉ ज़फ़र लोदी ने इन वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए और उनकी याद में उनकी पेटिंग बनाने की बड़ी जिम्मेदारी मुझे दी। उन्होंने उन वीरों को ये पेटिंग समर्पित की है। मेरी शादी दौराना जागीरदार फैमिली में हुई। ससुराल आकर इस परिवार में भी मुझे सेवा और प्रेम भाव देखने को मिला। मैं खुद को खुशनसीब मानती हूं कि मुझे ऐसा परिवार मिला।
कला अभिव्यक्ति का माध्यम है

मुझे सभी मीडियम पर वर्क करना पसंद हैं। नेचर पर बनी पेटिंग मुझे सुकून देती हैं। साथ ही मुझे ट्रेडिशनल आर्ट और अपने देश की प्राचीन इमारतों को अपनी पेटिंग में कवर करना पसंद है। आर्ट मेरे लिए प्रोफेशन ही नहीं जिंदगी का सुकून है। आर्ट एक तरह से मेडिटेशन है मेरे लिए। आर्ट वर्क बनाते समय हर कलाकार अपनी कला में इस तरह खो जाता है कि समय का पता ही नहीं चलता। कभी-कभी मैं सारी रात अपना आर्ट वर्क बनाती हूं। सुबह कब हुई पता ही नहीं चलता। मैं कुछ आर्ट ग्रुप से जुड़ी हूं जहां हम लोग आर्ट में रुचि रखने वालों को गाइड करते हैं उन्हें आर्ट रिलेटेड प्रोफेशनल स्किल्स सिखाते हैं। वर्ल्ड वाइड मेरे काफी स्टूडेंट्स हैं। हम साथ मिलकर उन स्टूडेंट्स की हेल्प करते हैं। जो स्टूडेंट्स आर्थिक तंगी के कारण आर्ट सीख नहीं सकते उन्हें मैं फ्री आर्ट क्लासेस देती हूं। उन्हें आर्ट मटेरियल भी हम ही देते हैं। जो महिलाएं किसी कारणवश अकेले अपने बच्चों की परवरिश कर रही हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उनकी भी हम मदद करते हैं।
अगली पीढ़ी कला को आगे बढ़ा रही है
मेरी बेटी एमबीबीएस की स्टूडेंट है। साथ ही वह पेंटिंग आर्टिस्ट भी है। वह कोरिया, मैरीलैंड, इजिप्ट में ग्रुप आर्ट एक्जीबिशन में हिस्सा ले चुकी है। बेटा भी पेंटिंग जानता है, लेकिन अभी वह पेंटिंग पर काम नहीं कर रहा है। रमज़ान के महीने में पेंटिंग का समय कम ही मिल पाता है। इस महीने हम जरूरतमंद लोगों की सेवा करने में जुटे रहते हैं। सेवा के मौके हजार हैं। हमें बस आगे बढ़कर अपना फर्ज निभाना होता है।
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