नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-चीन जैसे एशियाई देशों को बड़ा झटका दिया है। उन्होंने अमेरिका में 1.2 ट्रिलियन डॉलर के भारी व्यापार घाटे को कम करने के लिए "राष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल" की घोषणा की है। इसके साथ ही, उन्होंने आयात शुल्क भी बढ़ा दिया है। रिसर्च संस्था बजट लैब के अनुसार, ये शुल्क 1872 के बाद सबसे ज्यादा हैं। ट्रंप ने चीन पर 34 फीसदी तो भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया है। ये वही ट्रंप हैं, जो दुनिया के कई बड़े मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बता चुके हैं। जानते हैं कि ट्रंप का ये कदम दोस्ती की ओर बढ़ा कदम है या विश्वासघात है। पूरी बात समझते हैं। 1800 के दशक के बाद यह टैरिफ सबसे ज्यादा, मंदी की आशंकान्यूयॉर्क के एक इन्वेस्टमेंट बैंक एवरकोर का अनुमान है कि अमेरिका में औसत टैरिफ दर बढ़कर 29% हो गई है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। बजट लैब की एक रिसर्च के अनुसार, 1800 के दशक के अंत में टैरिफ 30% से ज्यादा था, तब से अब तक यह सबसे ज्यादा है। कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से 2025 में अमेरिका में मंदी आने की संभावना बढ़ गई है।
ट्रंप ने क्यों लगाया आर्थिक आपातकाल, यहां जानिएट्रंप ने 1977 के अंतरराराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (International Emergency Economic Powers Act) का इस्तेमाल किया है। उन्होंने व्यापार घाटे से पैदा हुए राष्ट्रीय आपातकाल से निपटने के लिए यह कदम उठाया है। यह कानून लगाते हुए उन्होंने कहा, हमारा देश और इसके टैक्सपेयर्स को 50 सालों से लूटा जा रहा है। अमेरिका के किस क्षेत्र को सबसे बड़ा नुकसानव्हाइट हाउस द्वारा जारी एक फैक्टशीट के अनुसार, अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को इतिहास में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 1997 से 2024 के बीच लगभग 50 लाख मैन्युफैक्चरिंग नौकरियां खत्म हो गईं। वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में देश की हिस्सेदारी 2001 में 28.4% से घटकर 2023 में 17.4% हो गई है। बयान में कहा गया है कि ये टैरिफ तब तक लागू रहेंगे जब तक राष्ट्रपति ट्रंप को यह नहीं लग जाता कि व्यापार घाटे और गैर-पारस्परिक व्यवहार से पैदा खतरा लगभग खत्म हो गया है। कार्यकारी आदेश (Executive Order) ट्रंप को टैरिफ बढ़ाने की अनुमति भी देगा, अगर उन्हें इसकी जरूरत महसूस होती है। नई टैरिफ नीति का असर क्या होगा?भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पहले से ही कई मुद्दों को लेकर तनाव में रहा है। यह टैरिफ भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में व्यापार करना महंगा बना सकता है। भारतीय उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगे सामान खरीदने पड़ सकते हैं। कई अमेरिकी कंपनियां, जो भारत से कच्चा माल या तैयार उत्पाद आयात करती हैं उनकी लागत भी बढ़ सकती है। ट्रंप ने फिर कहा, मोदी मेरे अच्छे दोस्त, पर...ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी 'डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ' की घोषणा की है। व्हाइट हाउस के मुताबिक़, भारत अमेरिका पर 52 फीसदी टैरिफ लगाता है। टैरिफ की घोषणा करते हुए अमेरिका राष्ट्रपति ने कहा-प्रधानमंत्री (मोदी) कुछ ही दिन पहले ही यहां से गए हैं और वो मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, पर मैंने उनसे कहा कि आप मेरे दोस्त हैं। लेकिन आप हमारे साथ सही नहीं कर रहे हैं। ट्रंप ने कहा-वे हमें 52 फ़ीसदी चार्ज कर रहे हैं। आप समझ रहे हैं.. इस लिहाज़ से हम उनसे लगभग ना के बराबर चार्ज कर रहे हैं...सालों और दशकों से। क्या था हाउडी मोदी प्रोग्राम, क्यों अहम थाहाउडी मोदी 22 सितंबर, 2019 को अमेरिका के टेक्सास के ह्यूस्टन में एनआरजी स्टेडियम में आयोजित एक सामुदायिक शिखर सम्मेलन और मेगा इवेंट था। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संयुक्त संबोधन के लिए जाना जाता था। इससे भारत-अमेरिका के बीच मजबूत संबंधों और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा मिला था। उसी वक्त से दुनिया ने मोदी-ट्रंप की दोस्ती को शिखर पर जाते हुए देखा था। अंतरराष्ट्रीय ट्रेड वॉर की आशंकाभारत और अन्य प्रभावित देश जवाबी कदम उठा सकते हैं और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं। इससे वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बन सकती है। हालांकि, ट्रंप का दावा है कि यह टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करेगा। उनका कहना है कि यह टैरिफ नीतियां वास्तव में काफी अच्छी हैं। हमने इससे भी ज्यादा शुल्क लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन हमने इसे कम रखा। हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है क्योंकि इससे वैश्विक व्यापारिक संबंध कमजोर हो सकते हैं। टैरिफ लगाकर क्या भारत की पीठ में घोंपा छुराभारत को दोस्त बताकर ट्रंप ने पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है। दरअसल, ट्रंप भारत पर लगाए 26 फीसदी टैरिफ को डिस्काउंटेड बता रहे हैं, क्योंकि उनका मानना है कि भारत उनके उत्पादों पर औसतन 52 फीसदी टैरिफ लगाता है। मगर, हकीकत यह है कि अमेरिका से भारत आने वाले महज 0.3 फीसदी उत्पादों पर ही 50 फीसदी या उससे ज्यादा टैरिफ लगता है। 2023 के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका से भारत में आए 3,724 उत्पादों में से सिर्फ 43 प्रोडक्ट पर ही 50 फीसदी या उसे ज्यादा का टैरिफ लगा था। यह अमेरिका के 40 अरब डॉलर के कुल निर्यात का महज 11.4 करोड़ डॉलर ही पड़ता है। जाहिर है कि उन्होंने भारत पर टैरिफ लगाते समय इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और 52 फीसदी का औसत शुल्क मानते हुए भारत पर 26 फीसदी टैरिफ लगा दिया। राष्ट्रीय आपातकाल लगाने से अमेरिका को कितना फायदाराष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कई आर्थिक समस्याओं को टारगेट करती है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये समस्याएं अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रही हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस कदम से अर्थव्यवस्था को 728 बिलियन डॉलर का फायदा हो सकता है और 28 लाख नौकरियां पैदा हो सकती हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए लागत बढ़ेगी। इससे पहले से ही सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था और भी नीचे जा सकती है, जिससे इस साल मंदी आ सकती है। एक्सपर्ट क्यों कह रहे हैं अमेरिका कर्ज कम करेएसेट मैनेजमेंट फर्म ब्रिजवाटर एसोसिएट्स के संस्थापक रे डालियो का कहना है कि सबसे जरूरी चीज है कर्ज कम करना। X पर एक पोस्ट में डालियो ने लिखा-...उत्पादन, व्यापार और पूंजी असंतुलन (सबसे महत्वपूर्ण कर्ज) को किसी न किसी तरह से कम करना होगा, क्योंकि वे मौद्रिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक कारणों से खतरनाक रूप से अस्थिर हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार, अमेरिका पर फिलहाल 36.22 ट्रिलियन डॉलर का राष्ट्रीय कर्ज है। वहीं, आर्थिक विश्लेषण ब्यूरो के अनुसार, देश की GDP 30.34 ट्रिलियन डॉलर है।
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