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सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर, क्यों बढ़ रही हैं कीमतें और क्या निवेश का यह सही समय है

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Getty Images एक तरफ़ सोने का भाव बढ़ रहा है तो डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत घटती जा रही है

सोने की कीमत क्या है?

सोने की कीमत लगातार क्यों बढ़ रही है?

सोने की कीमत कहाँ तक जा सकती है?

क्या अभी गोल्ड में निवेश करने का सही समय है?

डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, तब से दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल का माहौल है और 'सुरक्षित निवेश' माने जाने वाले गोल्ड को लेकर ऐसे सवाल लोग इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं.

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक 2 अप्रैल 2025 को 10 ग्राम (यानी भारत में प्रचलित एक तोला) सोने की कीमत 93 हज़ार रुपए को पार कर गई. पिछले कुछ दिनों से सोने का भाव लगातार बढ़े हैं.

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एक तरफ सोने की कीमत बढ़ रही है, वहीं डॉलर के मुक़ाबले रुपए में कमज़ोरी है.

जानकारों का मानना है कि इसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति का मेक्सिको, कनाडा और चीन पर नए टैरिफ़ लगाना और दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में गिरावट का माहौल होना है.

महंगाई की आशंका image Getty Images जब से ट्रंप राष्ट्रपति बने हैं तब से दुनियाभर के शेयर बाज़ारों में उथल-पुथल है.

ट्रंप प्रशासन के इन कड़े कदमों से दुनियाभर में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, निवेशक शेयरों में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई के लिए सोने में निवेश कर रहे हैं.

मार्केट विश्लेषक आसिफ़ इक़बाल कहते हैं, "मौजूदा माहौल में कई निवेशक गोल्ड को हेज़िंग रणनीति के रूप में ले रहे हैं. उन्हें आशंका है कि शेयर बाज़ार में नुकसान हो सकता है तो वो इसके लिए गोल्ड में निवेश का विकल्प देख रहे हैं."

अर्थशास्त्री प्रोफ़ेसर अरुण कुमार बीबीसी हिंदी से कहते हैं, "डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ लगाने से अनिश्चितता का माहौल है. दुनिया में अनिश्चतता होती है तो लोग सुरक्षा चाहते हैं. सोने की मांग बढ़ जाती है तो इस कारण इसके दाम बढ़ जाते हैं."

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कनाडा और मेक्सिको से आयात की जाने वाली वस्तुओं पर 25 फ़ीसदी और चीन पर 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने के आदेश दिए थे. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने मेक्सिको और कनाडा पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाने की योजना को 30 दिन तक टालने की बात कही है.

डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को छूट नहीं दी और उन्होंने यूरोपियन संघ पर भी टैरिफ़ लगाने की बात कही है. चीन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सामान पर टैक्स लगाने की बात कही है, यानी आने वाले समय में टैरिफ़ वॉर की आशंका बढ़ गई है.

सोना सुरक्षित निवेश है image Getty Images सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुँच गई हैं. ये भी पढ़ें-

एक और वजह है गोल्ड की कीमतों की बढ़ोतरी की और वह है दुनियाभर के केंद्रीय बैंक सोने की ख़रीदारी कर रहे हैं.

डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना और मध्य-पूर्व और रूस-यूक्रेन जंग के कारण भी सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रोफेसर अरुण कुमार कहते हैं, "डॉलर एक तरह से मजबूत करेंसी है. 2007 से 2009 के बीच आर्थिक मंदी के दौरान डॉलर तेज हो गया था लेकिन अन्य करेंसी गिर गई थी. डॉलर और सोना के बारे में माना जाता है कि ये नहीं गिरेंगे."

वो कहते हैं, "रुपये में गिरावट है तो लोग डॉलर और सोने की तरफ बढ़ेंगे."

डॉलर इंडेक्स में भी तेज़ी है और हाल ही में ये 109 के मार्क को भी पार कर गया है. यानी डॉलर का भाव सोने समेत पूरे कमोडिटी बाज़ार पर असर डाल रहा है.

प्रोफ़ेसर अरुण कुमार कहते हैं, "रुपया अन्य दूसरी मुद्रा के मुकाबले नहीं, लेकिन डॉलर के मुकाबले गिरा है. पाउंड और अन्य दूसरी करेंसी के मुकाबले रुपये नहीं गिरा है."

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी हाल ही में माना था कि डॉलर के मुक़ाबले रुपया कमज़ोर हुआ है, लेकिन कहा, "केवल मजबूत हो रहे डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है, जबकि मजबूत आर्थिक बुनियाद के कारण अन्य सभी मुद्राओं के मुकाबले स्थिर बना हुआ है."

क्या अभी गोल्ड में निवेश करना चाहिए image Getty Images कई जानकार गोल्ड को सुरक्षित निवेश मानते हैं.

जिस तरह की शेयर और कमोडिटी बाज़ार में अनिश्चितता है, ठीक उसी तरह कई जानकार भी भविष्य में गोल्ड की चाल को लेकर निश्चित नहीं हैं. जानकारों का मानना है कि एकमुश्त निवेश के बजाय लोगों को सोने में हर गिरावट पर ख़रीद की रणनीति अपनानी चाहिए.

मार्केट एक्सपर्ट आसिफ़ इक़बाल कहते हैं कि लंबी अवधि के लिए गोल्ड में निवेश का इरादा रखने वाले गोल्ड ईटीएफ़ और सॉवरेन गोल्ड फंड में निवेश कर सकते हैं.

आसिफ़ कहते हैं, "फिजिकल गोल्ड भी एक विकल्प हो सकता है, लेकिन ख़रीदारों को मेकिंग चार्ज और स्टोरेज़ कॉस्ट का भी ध्यान रखना चाहिए."

उनका कहना है कि दुनियाभर में कई देशों में अस्थिरता है और साथ ही महंगाई भी अपना असर दिखा रही है. ऐसे में सोने में बढ़त का रुख़ जारी रह सकता है, लेकिन ये एकतरफ़ा नहीं रहेगा और बीच-बीच में निवेशकों को ख़रीदारी का मौका मिलता रहेगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित

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