एक रात में 150 घरों की कॉलोनी वीरान हो गई। मुंह पर मास्क या रुमाल बांधे इक्का-दुक्का लोग ही नजर आए। सड़कों पर जगह-जगह पशु-पक्षियों की बदबूदार लाशें दिखीं...और सबसे खतरनाक गंध हवा में जहरीली गैस की थी। यह ब्यावर के बलाड़ रोड पर साधो का बाडिया गांव की गजानंद कॉलोनी है। 31 मार्च की शाम 6:30 बजे एक केमिकल फैक्ट्री में नाइट्रिक एसिड गैस लीक हो गई। कुछ ही देर में गैस पूरी कॉलोनी में फैल गई। गैस इतनी तेजी से फैली कि किसी इंसान या जानवर को मौका नहीं मिला। न भागने का, न बचने का। गैस की वजह से फैक्ट्री मालिक समेत 3 लोगों की मौत हो गई। दर्जनों पशु, सैकड़ों पक्षी मर गए।
ऐसा लगा जैसे अंधी हो गई हो, बच्चों को शॉल में लपेटकर भागी
चंता गुर्जर का घर हादसे वाली फैक्ट्री से 50 मीटर दूर है। उसने बताया- जब गैस लीक हुई तो लोग चिल्लाने लगे। आवाज सुनकर हम भी छत से देखने लगे। लोग फैक्ट्री मालिक सुनील जी से गैस बंद करने को कह रहे थे। सुनील ने कहा- 15 मिनट में फायर ब्रिगेड आ जाएगी। चिंता मत करो। डेढ़ घंटे तक गाड़ी नहीं आई। चंता ने कहा- हमारी गायों के मुंह से झाग निकल रहा था। कुत्ते और कबूतर संपर्क में आने पर वहीं गिर पड़े। हमने बच्चों को शॉल, दुपट्टे और रूमाल में लपेटा और घर के अंदर ले गए। तब भी मैं और बच्चे बेहोश हो गए। लगा कि आज नहीं बचेंगे। परिजन हमें अस्पताल ले गए। होश आया तो पता चला कि फैक्ट्री मालिक सुनील और पड़ोस में रहने वाले दयाराम जी की मौत हो चुकी है। लाल-पीली धुंध ने हमें घेर लिया, कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। अंजू का परिवार फैक्ट्री से 100 मीटर दूर रहता है। अंजू कहती हैं- रिसाव शुरू होने के कुछ ही देर में पूरी कॉलोनी में गैस फैल गई। कोहरे में बल्ब और एलईडी लाइटें सूरज की तरह दिख रही थीं। हम सांस नहीं ले पा रहे थे। आंखों में इतनी जलन थी कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। हमने कुछ बच्चों को तौलिए में लपेटा तो कुछ के गले में रुमाल बांधा। घर खुला छोड़कर कॉलोनी से बाहर भागे।
तीन साल पहले लगी थी फैक्ट्री में आग
महेंद्र सिंह का घर फैक्ट्री के रास्ते में ही है। जब हम उनसे मिले तो वे अजमेर अस्पताल से लौटे ही थे। घर पहुंचते ही गैस की तेज गंध से उनकी पत्नी की तबीयत फिर से खराब हो गई। उन्हें फिर से अस्पताल ले जाया जा रहा था। उन्होंने कहा- प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार मौखिक रूप से अवैध फैक्ट्री को कॉलोनी से हटाने का अनुरोध किया गया। किसी ने नहीं सुनी। 3 साल पहले भी कॉलोनी में पशु तेल बनाने वाली फैक्ट्री में आग लगी थी। उस समय भी धुएं के कारण तीन दिन तक कॉलोनी खाली रही थी। तब भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।
फैक्ट्री मालिक नहीं समझ पाए हादसे की गंभीरता
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि केमिकल फैक्ट्री मालिक सुनील सिंघल गैस रिसाव की गंभीरता को नहीं समझ पाए। न ही उन्होंने समय रहते लोगों को सचेत किया। कॉलोनी के लोगों ने बताया- गैस रिसाव के बाद फैक्ट्री मालिक सुनील फैक्ट्री से लेकर कॉलोनी की मुख्य सड़क तक घूम रहा था। लोगों से कहता रहा कि 'यह छोटी-मोटी बात है। आप कहीं मत जाओ। घर पर ही रहो। पांच मिनट में सब ठीक हो जाएगा।' लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
केमिकल फैक्ट्री होने के बावजूद यहां न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम थे और न ही ऐसी आपातकालीन स्थितियों के लिए दी जाने वाली उचित ट्रेनिंग। सुनील कुमार सिंघल इलाके में 'तेजाब वाले' के नाम से मशहूर थे। परिवार इस कदर सदमे में है कि कोई बात करने को तैयार नहीं हुआ। दोपहर तीन बजे अजमेर के सरकारी अस्पताल में उनका पोस्टमार्टम हुआ। शाम करीब पांच बजे शव घर लाया गया। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया।
सबसे बड़ा सवाल- आबादी वाले इलाके में कैसे चल रही थी केमिकल फैक्ट्री?
दिवंगत सुनील सिंघल की जिस केमिकल फैक्ट्री में यह हादसा हुआ, वह पहले बालद रोड स्थित दादाबाड़ी इलाके में थी। वहां आबादी बढ़ी तो डेढ़ साल पहले सुनील ने फैक्ट्री यहां शिफ्ट कर दी। धीरे-धीरे यहां कॉलोनियां भी बस गईं। इसके बावजूद न तो प्रशासन ने फैक्ट्री शिफ्ट करवाई और न ही सुनील ने इस खतरे को गंभीरता से लिया। 150 घरों वाली गजानंद कॉलोनी में वर्तमान में ऐसी 7 फैक्ट्रियां चल रही हैं। कॉलोनी में नमकीन, केमिकल, खल, मैदा, कुरकुरे और डिटर्जेंट बनाने की फैक्ट्रियां हैं। इसके अलावा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी है। नई फैक्ट्री का निर्माण कार्य चल रहा है।
हादसे के बाद कलेक्टर ने फैक्ट्री सील करने के आदेश जारी किए
अब हादसे के बाद कलेक्टर डॉ. महेंद्र खड़गावत ने आनन-फानन में फैक्ट्री सील करने और वहां से अन्य फैक्ट्रियों को भी हटाने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस पर खड़गावत ने कहा- जब तक इस तरह की अवैध गतिविधि नहीं होती, तब तक पता नहीं चलता। अब हम लोगों को इतना जरूर भरोसा दिला सकते हैं कि भविष्य में पूरे ब्यावर शहर में कहीं भी ऐसी घटना नहीं होने देंगे।
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