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पुराण प्रावधानों के साथ जारी हुआ नया टेक्सटाइल पॉलिसी का नया ड्राफ्ट, यहां पढ़े पूरी डिटेल

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राजस्थान सरकार ने राज्य में टेक्सटाइल क्षेत्र में नए निवेश को आमंत्रित करने के लिए 4 फरवरी 2025 को पहली टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति-2025 की घोषणा की थी। बजट के बाद जब राज्य के टेक्सटाइल संगठनों और उद्यमियों ने नीति दस्तावेज का विश्लेषण किया तो सामने आया कि यह नीति 8 अक्टूबर 2024 को जारी होने वाली राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना का दस्तावेज है। पहली टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति में कुछ भी नया नहीं है। विश्लेषण में सामने आया कि राजस्थान अभी भी गुजरात, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश जैसे औद्योगिक राज्यों से काफी पीछे है। तीनों राज्यों की टेक्सटाइल नीति में राजस्थान से ज्यादा फायदे हैं। राजस्थान में देश में सबसे महंगी औद्योगिक बिजली 7 से 8 रुपए प्रति यूनिट है। राजस्थान की नीति में बिजली दरों पर कोई सब्सिडी नहीं है, जबकि अन्य राज्यों में 1 से 3 रुपए प्रति यूनिट बिजली सब्सिडी है। राजस्थान की सबसे बड़ी मांग बिजली सस्ती करने की थी। औद्योगिक संगठनों ने यह तुलनात्मक रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजी है।

राजस्थान में नए और पुराने उद्योगों के लिए सबसे बड़ी समस्या महंगी बिजली है। राजस्थान के उद्यमी कई सालों से अलग से टेक्सटाइल नीति की मांग कर रहे हैं, लेकिन जब नीति जारी हुई तो उन्हें निराशा हाथ लगी क्योंकि इसमें कुछ भी नया नहीं मिला। बांसवाड़ा का ही उदाहरण लें। यहां से 50 से 100 किलोमीटर के दायरे में तीन राज्य राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात हैं। अगर आप 50 से 100 किलोमीटर के दायरे में कोई उद्योग लगाना चाहते हैं तो राजस्थान में उद्योग लगाना सबसे महंगा है। यहां नए उद्योगों के लिए जमीन आसानी से नहीं मिलती। सरकार को नए उद्योगों को और प्रोत्साहन देना चाहिए ताकि उन्हें शुरू करने में कोई दिक्कत न आए। सिंगल विंडो स्कीम को और मजबूत करने की जरूरत है ताकि उद्यमियों को हर काम के लिए इधर-उधर भटकना न पड़े।

जानिए- चार प्रमुख औद्योगिक राज्यों की टेक्सटाइल नीति का तुलनात्मक विश्लेषण
गुजरात: पूंजीगत सब्सिडी: 20 से 30 फीसदी ब्याज सब्सिडी: 8 साल के लिए 7 फीसदी
बिजली सब्सिडी: 5 साल के लिए 1 रुपये प्रति यूनिट सब्सिडी मिलती है। यह सब्सिडी ओपन एक्सेस से खरीदी गई बिजली पर भी उपलब्ध है।
प्रशिक्षण एवं कौशल प्रोत्साहन: एक श्रमिक को हर महीने 5,000 रुपये मिलते हैं।

महाराष्ट्र: पूंजीगत सब्सिडी: 30 से 45 प्रतिशत
बिजली सब्सिडी: पावरलूम, बुनाई, होजरी, परिधान इकाइयों के लिए 3.40 रुपये से 3.77 रुपये प्रति यूनिट। प्रसंस्करण एवं कताई इकाइयों के लिए 2 रुपये प्रति यूनिट।
अन्य: महाराष्ट्र प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना के तहत प्रौद्योगिकी उन्नयन पर 25 से 40 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी भी उपलब्ध है। यह सब्सिडी केंद्रीय सब्सिडी के अतिरिक्त उपलब्ध है।
आंध्र प्रदेश: पूंजीगत सब्सिडी: 30 से 40 प्रतिशत। विशेष श्रेणी में 45 से 55 प्रतिशत सब्सिडी।

बिजली सब्सिडी: एमएसएमई इकाइयों के लिए 2 रुपये प्रति यूनिट।
अन्य: प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना के तहत प्रौद्योगिकी उन्नयन पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी भी दी जाती है। विशेष श्रेणी में 45 प्रतिशत सब्सिडी भी दी जाती है। यह केंद्रीय सब्सिडी के अतिरिक्त है।

राजस्थान: निवेश सब्सिडी, पूंजी सब्सिडी या टर्नओवर प्रोत्साहन में से केवल 1 विकल्प पर सहायता
निवेश सब्सिडी: 7 वर्षों के लिए एसजीएसटी का 75 प्रतिशत अनुदान। 1 से 3 वर्ष के लिए अधिकतम 50 करोड़ रुपये प्रति वर्ष तथा 4 से 7 वर्ष के लिए 65 करोड़ रुपये प्रति वर्ष।

पूंजी सब्सिडी: यह 10 वर्षों में दी जाएगी। उद्योगों की तीन श्रेणियां बनाई गई हैं। बड़े उद्योगों में 13 से 20 प्रतिशत, बड़े उद्योगों में मेगा श्रेणी में 17 से 23 प्रतिशत तथा इससे भी बड़े उद्योगों में अल्ट्रा मेगा श्रेणी में 23 से 28 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसमें 1 से 3 वर्ष के लिए 50 करोड़ रुपये, 4 से 7 वर्ष के लिए 65 करोड़ रुपये तथा 8 से 10 वर्ष के लिए 80 करोड़ रुपये वार्षिक भुगतान किया जाएगा।

टर्नओवर प्रोत्साहन: यह 10 वर्षों में दिया जाएगा। इसमें बड़े उद्योग वर्ग में बिक्री के लिए 1.20 से 1.65 प्रतिशत, मेगा वर्ग में 1.40 से 1.85 प्रतिशत तथा इससे भी बड़े अल्ट्रा मेगा वर्ग में उसके टर्नओवर के अनुसार 1.65 से 2 प्रतिशत प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसमें 1 से 3 वर्ष तक 50 करोड़, 4 से 7 वर्ष तक 65 करोड़ तथा 8 से 10 वर्ष तक 80 करोड़ वार्षिक भुगतान किया जाएगा।

रोजगार: कंपनी द्वारा निर्धारित रोजगार से 1.5 से 2.5 गुना या अधिक रोजगार उपलब्ध कराने पर 10 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा। तीन प्रकार के बूस्टर भी तय किए गए हैं, इनमें से केवल एक ही लाभकारी होगा
थ्रस्ट बूस्टर: 10 प्रतिशत अतिरिक्त परिसंपत्ति सृजन प्रोत्साहन।
एंकर बूस्टर: 20 प्रतिशत अतिरिक्त परिसंपत्ति सृजन प्रोत्साहन।

ब्याज प्रतिपूर्ति: ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जाएगा, लेकिन यह प्रति वर्ष अधिकतम 2.5 प्रतिशत तक ही उपलब्ध होगा। यह भी तभी मिलेगा जब 5 साल के लिए पूंजी निवेश किया जाएगा।

विशेष प्रोत्साहन: भूमि की कीमत का 25% अग्रिम भुगतान किया जाएगा। शेष 75% का भुगतान 8% ब्याज के साथ 10 किस्तों में किया जाएगा और बैंक गारंटी प्रदान करने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। {बिजली प्रोत्साहन: कपड़ा, सिरेमिक, कांच और अन्य उद्योगों के लिए 7 साल के लिए एसजीएसटी की 5% अतिरिक्त सब्सिडी उपलब्ध होगी।
प्रशिक्षण और कौशल प्रोत्साहन: प्रशिक्षण केंद्र पर 6 महीने के लिए प्रति श्रमिक 4000 रुपये की सब्सिडी उपलब्ध होगी।
माल ढुलाई सब्सिडी: इनलैंड कंटेनर डिपो से बंदरगाह तक भेजे जाने वाले निर्यात माल पर भुगतान किए गए माल ढुलाई पर 25% सब्सिडी, लेकिन अधिकतम 25 लाख रुपये प्रति वर्ष उपलब्ध होगी।

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