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विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ के सामने भाजपा कार्यकर्ता का छलका दर्द, वीडियो में देखें बोला-आपके जूते मेरे माथे रख देना

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राजस्थान के राजसमंद जिले में बुधवार को एक जनसभा के दौरान हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। इस सभा में नाथद्वारा से बीजेपी विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ मौजूद थे, जब एक बीजेपी कार्यकर्ता ने मंच पर आकर अपनी नाराजगी जाहिर की। कार्यकर्ता का दर्द छलक उठा और उसने चुनाव के दौरान किए गए वादों की याद विधायक जी को दिलाई।

क्या है पूरा मामला?

जनसभा के दौरान जब विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ अपने संबोधन में सरकार की योजनाओं और बीजेपी की उपलब्धियों की चर्चा कर रहे थे, तभी एक बीजेपी कार्यकर्ता खड़ा हो गया और जोर-जोर से अपनी बात कहने लगा। उसने कहा कि चुनाव के समय पार्टी की ओर से जो वादे किए गए थे, वे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। कार्यकर्ता ने नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थानीय मुद्दों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे आम जनता में असंतोष बढ़ रहा है।

बीजेपी कार्यकर्ता की नाराजगी

मंच पर ही कार्यकर्ता ने विधायक से सवाल किया, "चुनाव से पहले जो वादे किए गए थे, उन्हें कब पूरा किया जाएगा? जनता ने आप पर भरोसा करके वोट दिया, लेकिन अभी तक समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।"

इस दौरान कार्यकर्ता ने क्षेत्र में सड़क, बिजली, पानी और बेरोजगारी से जुड़ी समस्याओं पर भी विधायक को घेरा। सभा में मौजूद अन्य कार्यकर्ताओं ने भी उनकी बात का समर्थन किया और हंगामा बढ़ने लगा।

विधायक ने दिया जवाब

इस अप्रत्याशित स्थिति को संभालते हुए विधायक विश्वराज सिंह मेवाड़ ने कार्यकर्ता को शांत कराया और आश्वासन दिया कि वे उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेंगे। उन्होंने कहा, "चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा करना हमारी प्राथमिकता है। कुछ योजनाओं पर काम चल रहा है और बाकी मामलों को जल्द ही सुलझाया जाएगा।"

जनसभा में हंगामे का माहौल

हालांकि, विधायक की सफाई से कार्यकर्ता पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने भी नाराजगी जताई, जिससे सभा में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, बाद में स्थिति सामान्य हो गई और सभा जारी रही।

राजनीतिक विश्लेषण

राजसमंद में हुई इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा शुरू हो गई है। इसे पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता की बढ़ती नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पार्टी अपने वादों को पूरा नहीं करती, तो आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है।

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