नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। भारतीय अल्पसंख्यक संघ द्वारा हजरत निजामुद्दीन औलिया दरगाह पर बहुधर्म सद्भावना ईद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विभिन्न धर्मों के बीच प्रेम, शांति और सद्भाव का संदेश फैलाना था। यह रमजान के पवित्र महीने के अंत में मुस्लिम समुदाय के साथ एकजुटता दिखाने का एक शानदार अवसर था। इस आयोजन में सिख, ईसाई, हिंदू, जैन और बौद्ध धर्मों के प्रतिष्ठित आध्यात्मिक नेताओं ने भाग लिया और अपने-अपने धर्मों की ओर से मुस्लिम समुदाय को ईद की मुबारकबाद दी।
कार्यक्रम में पीर ख्वाजा फरीद अहमद निजामी, अध्यक्ष सूफी सांस्कृतिक संगठन और सज्जादानशीन दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया ने इस आयोजन की महत्ता पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “यह आयोजन सभी धर्मों के बीच भाईचारे और समर्पण का प्रतीक है। हम सब मिलकर इस पवित्र स्थान पर आए हैं ताकि हम मुस्लिम समुदाय को ईद की मुबारकबाद दे सकें और समाज में शांति और एकता का संदेश फैलाएं।”
इस आयोजन में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के मुख्य सलाहकार परमजीत सिंह चंढोक ने कहा, “यह कार्यक्रम खुशी का एक बड़ा मौका है। हम सब एक ही देश के वासी हैं, चाहे हम सिख, हिंदू, मुसलमान, या किसी भी धर्म से संबंधित हों। जब हम एकजुट होकर त्योहार मनाते हैं, तो यह हमारे देश की एकता और विविधता का प्रतीक बनता है। पिछले साल रमजान के दौरान हमने इफ्तार पार्टी का आयोजन किया था और इस बार हम ईद मिलन कार्यक्रम मना रहे हैं।”
भारतीय अल्पसंख्यक संघ की सह-संस्थापक प्रो. हिमानी सूद ने कहा, “आज का दिन हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज हम एकजुट होकर देश की उन्नति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेहत के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। यह आयोजन सिर्फ ईद का जश्न नहीं है, बल्कि यह हमारी एकता और विविधता का उत्सव है। इसके अलावा, हम इस अवसर पर वक्फ विधेयक के महत्व पर भी चर्चा कर रहे हैं, जो देश के समग्र विकास के लिए आवश्यक और न्यायसंगत है।”
श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व कार्यवाहक जत्थेदार प्रो. मंजीत सिंह ने भी इस आयोजन की सराहना की। उन्होंने कहा, “ईद मुबारक सभी मुसलमान भाइयों को, और हम सिख समुदाय की ओर से भी उन्हें भाईचारे और प्रेम की शुभकामनाएं भेजते हैं। हमें बाबा फरीद जी की वाणी याद आती है, जिसमें उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान करने और सबमें अल्लाह ताला की जोत देखने की बात की है। हमें इस तरह के आयोजनों से यह संदेश मिलता है कि हम सब एक ही मकसद से यहां आए हैं - वह है शांति और सद्भावना।”
विश्व शांति संगठन के महासचिव मौलाना एम.ए.आर. शाहीन कासमी ने भी इस अवसर पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा हमारे समाज की एकता का प्रतीक है। यह न केवल भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, बल्कि यह वेदों में भी व्याप्त है कि सभी धर्मों के लोग एक साथ मिलकर चलें। हम सब एक साथ रहकर ही देश की उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ऐसे आयोजन हमें यह याद दिलाते हैं कि भाईचारे और शांति की आवश्यकता है।”
सर्व धर्म मैत्री और कैथोलिक आर्क डायोसिस के निदेशक फादर नॉर्बर्ट हरमन ने कहा, “आज हम सभी धर्मों के लोग एकत्रित हुए हैं ताकि हम अपने मुस्लिम भाइयों को ईद की मुबारकबाद दे सकें और समाज में सद्भावना और मोहब्बत को बढ़ावा दे सकें। हमारी संस्कृति का मूल संदेश हमेशा यही रहा है कि हम सभी धर्मों का सम्मान करें और एकजुट होकर समाज में शांति और एकता बनाए रखें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा इस बात को प्रोत्साहित किया है कि हमें समाज के हर वर्ग का समान रूप से समर्थन करना चाहिए, और आज का यह आयोजन उसी दिशा में एक कदम है।”
--आईएएनएस
पीएसएम/एकेजे
You may also like
Monsoon Forecast 2025: Heatwave and Thunderstorms to Sweep Across India – IMD Issues Multiple Alerts
नेहरु के बनाये रिश्ते, मोदी ने किस तरह एक-एक कर खोये ⁃⁃
05 अप्रैल को इन राशियों को मिल सकता है अपने लक्ष्यों की प्राप्ति
हरियाणा सरकार ने किसानों को 184 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजी
पानीपुरी वाले की गजब कमाई, GST विभाग ने भेजा 40 लाख का नोटिस; 'जॉब छोड़ने का समय आ गया! ⁃⁃